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Notices
CPE to be held on 26.03.2017 at Bhiwani is cancelled due to unavoidable circumstances. All the pharmacists who want to get themselves registered with the Haryana State Pharmacy Council should apply online first (which is mandatory) and thereafter submit the Hard copies of their documents in the office of Haryana State Pharmacy Council, Panchkula. They can get their documents attested by anyone of eleven Members of the Council who are authorized to do so and thereafter there is no need to visit the HSPC office for the verification of their documents for New Registration only. For Renewal purpose, they can send the documents with self attestation. This system is effective from 01st Jan 2016. The Fees for New Registration is Rs. 5150/- for period of five years. Remove Demand Draft drawn from Gramin Bank will not be accepted. For Renewal of Registration Certificate , Applicant must submit Original Two CPE Certificates, Payment Slip, Two Photos with Online Application Form. It is for the information of General Public and Registered Pharmacists that Aadhar Card is mandatory for Renewal as well as New Registration. President will be available in HSPC Office on Monday , Wednesday & Friday only Audit Report till FY 2014-15 Renewal fees w.e.f 01.04.2016 All the pharmacists who have uploaded their documents for New Registration on www.hspc.in are advised to visit Haryana State Pharmacy Council, #49 Haripur, Behind State Bank of Patiala, Sector-4, Panchkula alongwith their all original documents on any working day for further action on the council’s end. Registrar, HSPC, Panchkula
About Us

INTRODUCTION

Prior to the enactment of Pharmacy Act, 1948, there was practically no restriction on entry of persons into the profession of pharmacy. Anybody who could read a prescription could become a pharmacist.
The Pharmacy Bill was introduced by the Govt. of India in 1945 to regulate the profession and practice of pharmacy. The said act was passed in the shape of Pharmacy Act, 1948 (Act No.8 of 1948). The Act has been divided into 5 chapters and 46 sections. The act extends to the whole of India except the State of Jammu and Kashmir. It came into force on 4th March 1948 but the chapters relating to State Pharmacy Councils, Registration of Pharmacists, and Miscellaneous Provisions were to come in force in a particular State from such date as the State Government might, by notification in the official gazette, have appointed in this behalf. Following are the significant features of the act:

  1. The constitution of the Central and State Pharmacy Councils.
  2. The prescribing of the minimum standard of education required for qualifying as a pharmacist.
  3. The registration of the pharmacists by the State Pharmacy Councils.
  4. Maintenance of disciplinary control over the profession of pharmacy.
  5. Dispensing of prescriptions of registered medical practitioners only by registered pharmacists.

STATE PHARMACY COUNCIL

The State Governments constitute a State Pharmacy Council U/S 19 of the Pharmacy Act 1948. A constitution of the state council is as follows:

Elected Members

  1. Six registered pharmacists elected from amongst themselves
  2. One member elected from amongst themselves by the members of the Medical Council of the State.

Nominated Members

  1. Five members of whom at least three shall be possessing a degree or diploma in pharmacy or Pharmaceutical chemistry or be registered pharmacists, nominated by the State Government.

Ex-officio Members

  1. Chief Administrative Medical Officer of the State
  2. Officer-in-charge of Drugs and Cosmetics Act, 1940
  3. Government Analyst under the Drugs and Cosmetics Act as the State Government by appoint in this behalf.

हरियाणा राज्य फार्मेसी कांउसिल का इतिहास

हरियाणा राज्य फार्मेसी कांउसिल फार्मेसी एक्ट 1948, धारा 20 & 21 के तहत पंजाब एंड हरियाणा दोनो राज्यो की एक सांझी राज्य फार्मेसी कौसिल कार्यरत थी 21 अप्रैल 1971 को केंद्र सरकार ने अद्दिधेश जारी करते हुये हरियाणा सरकार को अलग से अपनी राज्य फार्मेसी कौसिल के गठन का अधिकार दिया हरियाणा सरकार ने 14 सदस्यो को मनोनीत करते हुये 23 मई 1972 को नोटिफिकेशन जारी करते हुये हरियाणा राज्य फार्मेसी कौसिल का गठन करते हुये धारा 19 (a) के तहत नोटिफेंशन जारी की गई इस धारा के तहत 6 सदस्यों का चुनाव अनिवार्य है जो नही करवाया गया इस लिए धारा 19 (a) के तहत की गई नोटिफिकेशन गलत थी। नव गठित हरियाणा राज्य को पहले 4 साल केवल रजिस्ट्रेशन, ट्रब्युनल गठन करने का अधिकार था और पहले 4 साल कौंसिल कार्यालय मे रजिस्ट्रार भी नियुक्त करने का अधिकार केवल राज्य सरकार को ही था । लेकिन 4 साल बाद कौंसिल कार्यालय मे रजिस्ट्रार, सटाफ, व फार्मेसी निरीक्षक नियुक्त करने का अधिकार केवल कौंसिल का ही है। लेकिन सरकार से पूर्व मे अनुमति लेकर ही नियुक्त की जा सकती है। कौंसिल का सर्व प्रथम चुनाव भी 21 अप्रैल 1976 को करवाया जाना चाहिए था जो नही करवाया गया, कौंसिल का चुनाव करवाने के लिए सरकार ने श्री के. सी गोयल के अनुरोध पर ऐल आर से राय मागी, ऐल आर की राय अनुसार ही 20/12/1982 को जो सर्व प्रथम चुनाव करवाया गया इस चुनाव मे मतदान का अधिकार केवल उन फार्मासिसटो को ही दिया गया है जो केवल 23 मई 1976 तक ही रजिस्ट्र्डट थे जो फार्मासिस्ट 23 मई 1972 मे चुनाव की तारीख तक रजिस्ट्रड हुए थे उन सब को मतदान का अधिकार नही दिया गया। सरकार ने 20/12/1982 को चुनाव करवाया लेकिन बगैर किसी सविधानिक अधिकार के ही 30 मार्च 1983 को धारा 26 की अवेहलना करते हुए कौंसिल कार्यालय मे मिस्टर एस.एम नेहरा को रजिस्ट्रार नियुक्त कर दिया गया। लेकिन सरकार को यह अधिकार नही था । केवल कौसिल को ही यह अधिकार है ।
मिस्टर ऐस ऐम नैहरा जो केवल अनुभव के आधार पर आर्युवेद मे ही रजिस्ट्रड आर ऐम पी है लेकिन कुछ राजनितियों एव्म नौकर शाहो को हर समय हर प्रकार की सुख सुविधा उपलब्ध करवाने मे महारथी है, शायद इसलिए ही सभी नियमो को दर किनारे करते हुए मिस्टर नैहरा को हरियाणा राज्य मैडिकल कौंसिल, डैटिल कौसिंल, नर्सिग कौंसिल एवम फार्मेसी कौंसिल चारो ही कौंसिलों का रजिस्ट्रार नियुक्त किया गया, राजनैतिक सॉठ- गॉठ एवम संरक्षण का लाभ उठा कर कौंसिल कार्यालय को मिस्टर नैहरा की निजी दुकान बना कर चलाया गया। इस की पुष्टी मान्नीय उच्च न्यायालय ने भी 22.07.2007 के फैसले में की है। जो CWP 10466/96 एव्म CWP 1086/97 का फैसला सुनाते हुये किया
हरियाणा सरकार ने अम्बाला कैन्ट से ततकालिन ऐम ऐल ए श्री राम दास धमीजा जी को कौंसिल का सदस्य मनोनित किया गया जिसे बाद में प्रधान बनाया गया।
हरियाणा मे सत्ता परिवर्तन हुआ तो मिस्टर नैहरा को 27 जुन 1986 को बरखास्त कर दिया गया । मिस्टर नैहरा ने माननीय उच्च न्यायलय चण्डीगढ मे अपील दाखिल की जो खारिज कर दी गई। 27.08.1997 को कौंसिल के रजिस्ट्रार का अतिरिक्त चार्ज ततकालिन निर्देशक स्वास्थ्य विभाग हरियाणा डाक्टर डी. आर वधावन को दिया गया डाक्टर वधावन सेवा निवृत हुये तो चार्ज 22.07.1990 को डाक्टर विनय कपुर को दे दिया गया हरियाणा में फिर से सत्ता परिवर्तन हुआ तो 06/04/1992 को मिस्टर नेहरा को फिर से रजिस्ट्रार हरियाणा राज्य फार्मेसी कौसिल नियुक्त कर दिया गया जो धारा 26 की अव्हेलना थी ओर गैर कानूनी था कौसिल का चुनाव 28/10/1988 तक करवाया जाना चाहिये था जो नही करवाया गया ।
हरियाणा में फिर से सत्ता परिवर्तन हुआ तो मिस्टर एस. एम. नेहरा को 06.04.1992 को फिर से रजिस्ट्रार नियुक्त कर दिया गया जो धारा 26 की अव्हेलना थी ओर सरकार को उस समय भी इस का अधिकार नही था कौसिल का चुनाव करवाने की बजाये सरकार ने दो नामजद सदस्यो को बदल कर दो नये सद्स्य मनोनीत करते हुये नोटीफिकेश्न 23/08/1992 दिनांक 07/06/1994 जारी की गई तीन सदस्यो को फिर से मनोनीत करते हुये नोटिफिकेशन न. 23/08/1992-3H BII दिनांक 27/11/1995 जारी की गई इन तीन सदस्यो में तत्कालीन कौसिल प्रधान श्री राम दास धमीजा जी भी थे जो इस नोटीफिकेशन के बाद कौसिल के प्रधान नही रहे इसलिये सरकार ने केवल कौसिल प्रधान का ही चुनाव करवाने के आदेश पारित किये ओर तत्कालीन महा निदेशक डाक्टर वि. एस पवार जी की अध्यक्षता में कौसिल की मीटिंग बुला कर नये कौसिल प्रधान का चुनाव करवाया गया । उस चुनाव में मुझे सर्वसहमति से के.सी गोयल को हरियाणा राज्य फार्मेसी कौसिल का नया प्रधान चुना गया मिस्टर नेहरा जो अपनी पंसद का प्रधान बनवाना चाहता था नही बनवा पाया ओर मनमानी करते हुये कौसिल कार्यालय में आने वाले सभी फार्मासिस्टो को परेशान करने लगा इसलिये मजबूरन सरकार को 10/07/1996 को मिस्टर नेहरा को जो नियुक्ति पत्र 06/04/1992 को दिया गया था वह वापिस ले लिया गया ओर उसे बरखास्त कर दिया लेकिन मिस्टर नेहरा ने मान्नीय पंजाब एण्ड हरियाणा उच्च न्यायलय चण्डीगढ मे CWP/10466/1996 दिनांक 10/07/1996 को दाखिल करते हुये 22/07/1996 को स्टे प्राप्त कर लिया ओर कौसिल कार्यालय को पुरी तरह से अपनी निजी दुकान में तबदील कर लिया गया सरकार का कोई भी उच्च अधिकारी नेहरा के खिलाफ कुछ भी सुनने से कतराने लगा
इसलिये कौसिल कार्यालय को मिस्टर नेहरा के चुंगल से मुक्त करवाने, कौसिल के चुनाव करवाने एवं कौसिल कार्यालय में की जा रही अनियमताओ के बारे में जांच करवाने के लिये मैने कुछ दूसरे सदस्यो के साथ मान्नीय उच्च न्यायलय चण्डीगढ में CWP 10886/97 दिनांक 28/07/1997 को दाखिल की लेकिन रिट दाखिल करते ही मुझे चारो ओर से धमकीयां मिलने लगी और रिट वापिस लेने के लिए ततकालिन उच्च अधिकारियों ने दवाब भी बनाया लेकिन जब मैंने रिट वापिस नही ली तो मेरे और दुसरे सदस्यों के खिलाफ जिस मे पूर्व प्रधान श्री राम दास धमीजा जी भी शामिल थे के खिलाफ रिट दाखिल करने के केवल एक माह बाद ही 28/8/1997 को सैक्टर-17 चण्डीगढ में 274/1997 FIR दर्ज कर दी गई। 12 साल की सुनवाई के बाद 10/11/2009 की अदालत ने ह्म सब को पुरी तरह से बरी कर दिया लेकिन मिस्टर नैहरा दवारा ने भ्रष्ट उच्च अधिकारियों की मदद से निचली अदालत के फैसले के खिलाफ जिला अदालत मे अपील दाखिल करवा दी गई। जिला अदालत ने भी हम सब को 04/03/2013 को पुरी तरह से बरी कर दिया गया। 2006 मे CWP10886/97 सुनवाई के लिए लिस्ट मे आई तो फिर से यह रिट वापिस लेने के लिए मेरे उपर दबाव बनाया गया ततकालिन महा निदेशक स्वास्थ्य डाक्टर नील कंठ ने मुझे रिट वापिस लेने के लिए कहा और धमकी दी कि यदि रिट वापिस नही ली गई तो आप को नतीजे भुगतने पड सकते है
लेकिन मैंने रिट वापिस लेने से पुरी तरह से इन्कार कर दिया तो थाना सैक्टर 17 चण्डीगढ मे मेरे खिलाफ एक और FIR 193 दिनाक 17/05/2006 दर्ज कर दी गई।
FIR NO. 193 दिनांक 17/05/2006 ततकालिन महा निदेशक स्वास्थ्य विभाग हरियाणा ने मिस्टर नैहरा की और से मेरे खिलाफ दी गई झूठी शिकायत को ततकालिन स्वास्थ्य सचिव की सिफारिश करवा कर चण्डीगढ के ग्रह सचिव के पास मेरे खिलाफ दिनांक 17/05/2006 को दी गई शिकायत जो इस बात की पुष्टी करता है कि मिस्टर नैहरा बेहुदा व भ्रष्ट उच अधिकारियों व कुछ राज नेताओं को हर प्रकार की सुख सुविधा उपलब्ध करवाता रहा है। FIR 193 पिछले 10 सालो से सुनवाई के लिए बकाया है।
22/07/2007 की मान्नीय पंजाब एण्ड हरियाणा उच्च न्यायालय चण्डीगढ ने CWP 10466/97 ए व म 10886/1997 का फैसला सुनाते हुऐ मिस्टर नैहरा को जो स्टे 22/07/1997 को दिया गया था वह रद्द कर दिया गया और मिस्टर नैहरा को बरखास्त कर दिया गया। मिस्टर नैहरा को 1 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया और राज्य चौकसी ब्यौरो को 6 माह के अन्दर जॉच करके मिस्टर नेहरा के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दिये। मिस्टर नैहरा ने 27/11/1995 तक तो श्री राम दास धमीजा जी से बतौर प्रधान नियम 141 के तहत हस्ताक्षर करवाये लेकिन जब श्री धमीजा जी प्रधान नही रहे तो कौंसिल का बैंक खाता जो 13083 था को 63083 मे तबदील करवा कर केवल खुद को D.D.O बनवाया।
नियम 131 के तहत बतौर रजिस्ट्रार केवल 100 रुपये ही अपने पास रख सकता था और बाकि सारा पैसा कौंसिल के बैंक खाते मे जमा करवाया जाना जरुरी है।
नैहरा से कौंसिल कार्यालय का चार्ज भी सरकार की और से गठित उच्च अधिकारियों की टीम ने ताले तुडवा कर लिया और 7 लाख 7 हजार 158 रुपये नकद जो छूपा कर रखे हुऐ थे बरामद किये और कौंसिल के बैंक खाते मे जमा करवाये गये लेकिन चौकसी ब्यूरो की नजर मे यह कोई गुनाह नही है। 1 लाख 38 हजार रुपये का रिकवरी का नोटिस ACS कार्यालय की और से मिस्टर नेहरा को 2005 मे जारी किया गया जिसकी आज तक भी वसूली न ही की गई।
2001 मे मिस्टर नैहरा ने बगैर किसी अधिकार के ही ततकालिन स्वास्थ्य सचिव को खुश करते हुऐ नोटिफिकेशन जो 23/02/2000—3 HB2 दिंनाक 8 जनवरी 2001 जारी करवाया जो केवल धारा 28 के तहत ही जारी किया जा सकता है ओर केवल कौंसिल की सिफरिश से ही जारी की जा सकती है, लेकिन 1992 के बाद मिस्टर नेहरा ने कोई मीटिग नही बुलाई । इसलिए कौंसिल मे ऐसा कोई प्रस्ताव भी पास नही किया लेकिन मिस्टर नैहरा ने कौंसिल कार्यालय मे ली जाने वाली फीस 5 से 10 गुणा बढोतरी करके 50 लाख से भी अधिक राशी को वसूल किया जो कौंसिल के खाते मे जमा ही नही करवाया गया।
नियम 139 के तहत बतौर रजिस्ट्रार मिस्टर नैहरा केवल 50 रुपये ही खर्च कर सकते थे इस से अधिक सभी खर्च प्रधान के हस्ताक्षरो से ही किये जा सकते है लेकिन 27/11/95 के बाद कभी भी प्रधान से किसी भी बिल पर हस्ताक्षर नही करवाये गये लेकिन चौकसी ब्यौरो की नजर मे यह गलत नही है। गबन भी है ।
इस प्रकार आज तक चौकसी ब्यौरो ने मिस्टर नैहरा के खिलाफ कोई भी कार्यवाई नही की शायद मिस्टर नैहरा ने चौकसी ब्यौरो को भी अपनी सेवाए उपलब्ध करवाई हो इस लिए उस के खिलाफ कोई भी उच्च अधिकारी कोई भी कार्यवाही नही करना चाहता।
मिस्टर नैहरा ने खुले आम स्टेट फार्मेसी नियम 131,134,139,141 की अवहेलना करते हुये 50 लाख से भी अधिक रुपये जो फार्मासिटों से वसूला गया, कौंसिल के बैक खाते मे जमा न करवाकर बगैर किसी अधिकार के खर्च दिखा कर गबन किया। धारा 26 के अवहेलना करते हुये कौंसिल कार्यालय मे बगैर किसी अधिकार के ही कर्मचारी नियुक्त किये। कौंसिल की चल अचल सम्पति खुर्द-बुर्द की गई। लेकिन यह सब चौकसी ब्यौरो को दिखाई नही दिया। मान्नीय पंजाब एण्ड हरियाणा उच्च न्यायलय चण्डीगढ ने 22.02.2007 को कौसिल के चुनाव जल्द से जल्द करवाने के आदेश दिये लेकिन स्टेट फार्मेसी नियम 5 के तहत कौसिल का चुनाव केवल कौसिल प्रधान ही करवा सकता है बतौर चुनाव अधिकारी प्रधान खुद भी कार्य कर सकता है व प्रधान की ओर से मनोनीत प्रधान का नुमायदा भी चुनाव अधिकारी बन सकता है इसलिये बतौर कौसिल प्रधान मैने डाक्टर प्रवीन सेठी निदेशक दन्त चिकित्सा हरियाणा को बतौर चुनाव अधिकारी नियुक्त किया लेकिन मिस्टर नेहरा ने मान्नीय उच्च न्यायालय से न्यायालय का सेवा निवृत जज श्री एम. आर अग्निहोत्री जी को बतौर ओबजर्वर नियुक्त करवा दिया इसलिये जज साहिब की निगरानी में डाक्टर प्रवीन सेठी जी ने कौसिल का चुनाव जो 1983 के बाद 24 साल बाद करवाया गया 6 सदस्यो का चुनाव 17.10.2007 के मुकमल करवाया गया 5 सदस्यो को मनोनीत करते हुये तीन Ex Officio सदस्यो के साथ 30.11.2007को गजट नोटीफिकेशन जारी की गई नये प्रधान का चुनाव करवाने के लिये 24.12.2007 को न्व निर्वाचित कौसिल की मीटिग बुलाई गई जिस में डाक्टर सुरेंद शर्मा को कौसिल प्रधान चुना गया । जो केवल आयुर्वेद में रजिस्ट्रड आर एम पी है ।
नवनिर्वाचित कौसिल को सर्व प्रथम मीटिग 10.01.2008 को जनरल बाडी मीटिंग बुलाई गई जिस के प्रस्ताव न. 9 पर डा. प्रवीन सेठी जी का नाम कौसिल के रजिस्ट्रार के लिये मंजूर किया गया लेकिन शर्मा जी ने सांठ गांठ करते हुये नियमो की अव्हेलना करते हुये 15 दिन की बजाये केवल 6 दिन बाद ही 16.01.2008 को बगैर किसी नोटिस के रोहतक में केवल E.C Meeting बुलाई ओर उस मीटिंग के प्रस्ताव न. में 10.01.2008 की मीटिग की कार्यवाही को मंजूर कर लिया गया ओर प्रस्ताव न. 2 पर मिसटर अशोक नागपाल जो झज्जर में नागपाल मैडीकल हाल पर बतौर E.P कार्य कर रहे थे वहा से बगैर कोई त्याग पत्र दिलवाये ही 16.01.2008 को ही बगैर धारा 26 के अन्तर्गत सरकार से पुर्व मे अनुमति लिये ही मिसटर अशोक नागपाल जो केवल आयुर्वेद में रजिस्ट्रड आर. एम. पी है, को इस कौसिल का रजिस्ट्रार नियुक्त कर दिया गया लेकिन जांच पर पता चला कि मिस्टर नागपाल के पास फार्मासिस्ट का रजिस्ट्रैशन भी फर्जी है जिस को धारा 36 के तहत नोटिस जारी करते हुये रद्द कर दिया गया मि. नागपाल को हटा कर डाक्टर धर्मपाल लोचन को रजिस्ट्रार का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया । जब कौसिल का रिकार्ड कौसिल की वैबसाईट पर अपलोड करवाया गया तो पकड में आये 57 फर्जी रजिस्ट्रैशन जो दूसरो के पेपर सकैन करते हुये करवाये गये 37 रजिस्टैशन जो कम आयु में अथ्वा जन्म से पहले भी रजिस्ट्रड करवाये गये 85 रजिस्ट्रैशन जो बगैर किसी सबूत के ही रजिस्ट्रड करवाये गये, 45 रजिस्ट्रैशन जो एक ही व्यक्ति को दो-दो नम्बर जारी किये गये इन सब को धारा 36 में कैंसिल करने के नोटिस जारी किये गये ।
4800 रजिस्ट्रैशन जो कभी भी नवीनीकरण नही करवाये गये इन सब को धारा 34(2) नियम 74 (4) के अन्तर्गत नोटिस जारी करते हुये समय पर जवाब न आने पर रद्द कर दिया जायेगा । डाक्टर धर्मपाल जी के बाद श्री सुरेंद्र याद्व जी को इस कौसिल का रजिस्ट्रार नियुक्त किया गया जिस को नियुक्त करने के लिये केवल 89 दिन की ही इजाजत दी गई थी 22.09.2014 को हिसार से वरिष्ठ फार्मासिस्ट श्री सोहन लाल कांसल जी को रजिस्ट्रार का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया जो 31 अक्टुबर 2015 को सेवा निवृत हुये ।
कौसिल का चुनाव 17.10.2012 तक करवाया जाना चाहिये था लेकिन राजनैतिक संरक्षण व सांठ गांठ से शर्मा जी मिस्टर नेहरा की ही तर्ज पर चलते हुये यह चुनाव करवाना नही चाहते थे । इसलिये मुझे के.सी गोयल को मान्नीय उच्च न्यायालय में CWP 7836/2013 दाखिल करनी पडी तथा कौसिल का चुनाव 10.11.2013 को 6 सद्स्यो का चुनाव करवा कर 5 सद्स्यो को मनोनीत करते हुये तीन Ex officio सदस्यो के साथ 03.03.2014 को गजट में नोटिफिकेशन जारी की गई प्रधान का चुनाव 02.06.2014 को करवा कर 16.07.2014 को गजट नोटिफिकेशन जारी की गई । मुझे के.सी गोयल को सर्व सम्मानित से कौसिल प्रधान चुना गया लेकिन पूर्व प्रधान श्री शर्मा जी ने नव निर्वाचित कौसिल का मुकम्मल चार्ज नही दिया जिसको लेने के लिये अदालत में सिविल सूट दाखिल की गई है 02.06.2014 को कौसिल प्रधान का कार्यभार गठन करने के बाद कौसिल कार्यालय को बदल कर बढिया कार्यालय बताया जिस में सभी प्रकार की सुविधाए जैसे अलग-2 स्टाफ के कैबिन, प्रधान व रजिस्ट्रार के अलग केबिन, लेखा ब्रांच, सभी लोगो के बैठने, पीने के पानी आदि की मुक्कमल प्रंबध, बढिया रिकार्ड रुम, सभी कमरो में CC TV कैमरे सभी फार्मासिस्टो का मुक्कमल ब्योरा कौसिल की Website के उपर अपलोड करवाया गया कौसिल से होने वाले सभी कार्य को आन लाईन करवाया गया कौसिल के सभी सद्स्यो को मानदेह दिया गया। कार्यालय में लैड लाईन टैलीफोन लगवाया गया हरियाणा में प्रथम बार हरियाणा फार्मासिस्ट के एक सम्मेलन इंद्र धनुष ओडिटोरियम में बुलवाया गया जिस में फार्मेसी कौसिल आफ इण्डिया की पुरी E.C भाग लेगी तथा सरकार से बार-2 अनुरोध करने के बावजूद भी कौसिल को धारा 26 & 26 A के तहत पूर्व में अनुमति नही दी गई तो मजबूरन सरकार के खिलाफ कोर्ट में CWP 23687/29.05.2015 दाखिल किया गया । 05.11/2015 को मान्नीय उच्च न्यायालय ने चण्डीगढ ने नोटिस जारी करते हुये हरियाणा सरकार से जवाब मांगा है जो 05.12.2015 तक देना है इस के बाद ही कौसिल कार्यालय में स्थाई रजिस्ट्रार व स्टाफ 42 साल बाद नियुक्त किया जा सकेगा जिस से अनिमियता समाप्त होगी हरियाणा राज्य फार्मेसी कौसिल देश की सब से बेहतर कौसिल साबित होगी

Member of Council

# Name of CandidateDesignation In CouncilAddressContact No.
(I) Elected Members
1.Sh. Krishan Chand Goel President Goyal Medical Store, 693/17, Gurthali Road Narwana, Jind. 9416176132, 0172-2587622
2. Sh. Sohan Lal Kansal Member EC 518, Sector 13, Hissar 01662-245518
3.Dr. Yash paul Singla Member E C & Chairman CPE Principal , Lord Shiva College of Pharmacy, Near Civil hospital, Sirsa 9416488885, 9255445884, 01666-329204
4.Sh. Arun Prashar RegistrarD-18,Dayal Bagh Mahesh Nagar,Ambala Cantt 9813286982
5.Sh Raj Kumar Member E C Main bazaar, chachhrauli, Yamunanagar, Haryana 9416919543
6.Sh. Dhanesh Adhlakha Member & Ex Vice President #133, Sector 9, faridabad 09650540960
7.Sh. Rohit Khanduja Member 347, Sector 9, Faridabad 09650540959 (Email:rohitkhandooja@gmail.com)
( II) Nominated Members
1.Sh Pankaj kumar Vice President C/o Kansal Medical Hall, Fountain Chowk, Sohna, Gurgaon 9355513726
2.Amit Nagpal treasurer M/S, Nagpal Medical Store, Jahanara Chowk, Jhajjar 9896213636, 8813813636
3.Ved Prakash Member HSPC & PCI 770, Sector 1, Narnaul 9416065770
4.kailash Chander Khanna Member & Ex President 1074, Huda Sector, 1 Rohtak 9812323606
5.Dr. Surinder Sharma (GAMS) Member 1487/21, Adarsh Nagar, Opp D Park, Rohtak 9355611864
(II) Ex-Officio-Members
1.Dr Narender Arora Diretor General Health Services Haryana Sector 6, Panchkula 0172-2584549
2.Sh. R. K. Singla State Drugs Controller Haryana Sco 94, Sector 5 Panchkula
3.Ms Kusum Nehra Govt. Analyst State Drug laboratory Haryana Sec. 11, Chandigarh
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Head Office Haryana State Pharmacy Council
#49, Haripur,1st floor, Behind State Bank of Patiala, Near Park, Sector 4
Panchkula.

Ph. - 0172-2587622, 08699055894
Email - haryanastatepharmacycouncil@gmail.com